चंडीगढ़ [संजीव सलारिया]। शादी और तुमसे- जी हा, होकर रहेगी। शादी की जल्दी में जुटे हरेक जवा जोड़े का एक दूजे से यही कहना है क्योंकि नवंबर-दिसंबर में ब्याह के बंधन में बंधने के अब सिर्फ सात दिन बाकी बचे हैं, कुंवारों की किस्मत इस साल अब सिर्फ सात दिन ही खुलेगी।
गुरु और शुक्र के अस्त होने की वजह से सर्दियों में ब्याह का मुहूर्त कम है, 2009 के सभी मुहूर्त 10 दिसंबर को खत्म हो जाएंगे। इसके बाद 11 फरवरी 2010 को ही जोड़े वैवाहिक सूत्र में बंध सकेंगे।
बसंत पंचमी इस बार बिना शहनाई-बैंड के
पंचनद ग्लोबल एजूकेशन फाउंडेशन के निदेशक डा. राजिंदर कपिल और सचिव डा.राजीव कपिला के मुताबिक नवंबर-दिसंबर में कई सालों बाद ऐसा मौका आ रहा है जब देवउठनी एकादशी और वसंत पंचमी पर न शहनाई और न बैंड बाजे की धुन सुनाई पडे़गी। उन्होंने बताया कि नवंबर 29 और दिसंबर में 1, 2, 7, 8, 9 व 10 तारीख विवाह के लिए शुभ है।
गुरु पति और शुक्र पत्नी कारक
डा. कपिला ने कहा कि गुरु पति कारक और शुक्र स्त्री सुख का कारक माना जाता है, इन दोनों ग्रहों से अस्त होने से जीवन में सुख की कमी आती है, अत: शादी विवाह के लिएयह समय शुभ नहीं माना जाता। लोकभाषा में इसे तारा डूबना कहते हैं। इस बार 13 और 14 दिसंबर की रात अस्त होने के बाद शुक्र 8 फरवरी को दोबारा उदय होगा, इसी तरह गुरु 16 फरवरी को अस्त होगा और दोबारा 25 मार्च को उदय होगा। यानी ब्याह के लिए मुहूर्त की स्थिति 11 फरवरी के बाद ही बन पाएगी।
शादियों में पंजाब आगे
इवेंट मैनेजमेंट, कैटरर व ट्रासपोर्ट से जुड़े कारोबारियों की मानें तो 13 लाख से ज्यादा की आबादी वाले चंडीगढ़ में हर साल 4,000 और तीन-तीन करोड़ की आबादी वाले दो राज्यों हरियाणा में और पंजाब में जन्मदर रिकार्ड से निकाले औसत की बात करें तो क्रमश: 45 हजार और 60 हजार शादिया होती हैं। ग्रामीण परिवेश और शहरीकरण दोनों लिहाज से शादियों की दौड़ में पंजाब आगे है।
कैटरर्स व ट्रासपोर्ट पर 30 फीसदी असर
हरियाणा व पंजाब के ट्रकों की आमद वाले चंडीगढ़ ट्रासपोर्ट क्षेत्र के ट्रासपोर्टर अश्रि्वनी शर्मा ने बताया कि सीजन में यहा रोजाना 30 से 35 और पंजाब के लुधियाना व जालंधर से 70 के बीच ट्रक फर्नीचर व अन्य सामान से लोड होते हैं। अक्टूबर, नवंबर व दिसंबर के बिजनेस में इस बार 30 फीसदी तक का असर देखने को मिल रहा है। चंडीगढ़ ट्रासपोर्ट क्षेत्र से 200 ट्रक जुड़े हैं। गोल्डन कैटरर्स का कहना है कि सर्दी के तीन महीनों में अकेले चंडीगढ़ में 500 से ज्यादा शादिया होती हैं। अत: तारा डूबने से कारोबार पर 40 फीसदी तक असर पड़ेगा।
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