Tuesday, December 8, 2009

ब्रिटेन में गुलाबी रंग को लेकर बहस

क्या रंग भी समाज में बहस और राजनीतिक मुद्दा बन सकता है? जरा ब्रिटेन के इस मामले पर गौर कीजिए। यहां पर पिंक यानी गुलाबी रंग के प्रति लड़कियों की दीवानगी समाजिक और राजनीतिक बहस का कारण बन गई है।
पूरे ब्रिटेन में 'पिंकस्टिंक्स' नाम का एक आंदोलन चल रहा है, जिसमें लोगों से उन दुकानों का बहिष्कार करने की अपील की गई है, जो लड़कियों के ऐसे कपड़े और खिलौने बेचती हैं, जिनका रंग गुलाबी है। अब इस सामाजिक लड़ाई को राजनीतिक रंग देने का काम किया है, लेबर पार्टी की सांसद ब्रिगेट पेंटिस ने। उन्होंन इस आंदोलन को अपना समर्थन देने की घोषणा की है।
गुलाबी रंग का विरोध करने वालों का कहना है कि यह रंग लड़कियों को मानसिक रूप से कुंद करता है। उन्हें सामाजिक और निजी जीवन में निष्क्रिय बनाता है और उनके मन में गहराई से यह बात जमाता है कि खूबसूरती बुद्धिमानी से ऊपर होती है। पेंटिस का कहना है कि लड़कियों को 'गुलाबी गुड़िया' बना देना, उनके भविष्य के लिए घातक है। इससे उनका ध्यान जीवन की चुनौतियों और कैरियर पर से खत्म हो जाता है। वे एक काल्पनिक दुनिया में रहने लगती हैं।
पेंटिस का तर्क है जिस तरह से लड़कों के खिलौने वाली बंदूकों पर इसलिए पाबंदी लगाई गई है कि उनकी मानसिकता अपराधियों वाली न बने, इसी तरह लड़कियों का भविष्य सुधारने के लिए हमें 'पिंक' पर प्रतिबंध लगाना होगा। गुलाबी रंग के प्रति लड़कियों की दीवानगी को खत्म करके ही उन्हें कमजोर भविष्य की राह पर बढ़ने से बचाया जा सकता है।
हालांकि कई अभिभावक गुलाबी चीजों को लड़कियों के लिए प्रतिबंधित करने के पक्ष में नहीं हैं। उनका कहना है कि जैसे घोड़े को पानी तक तो ले जा सकते हैं, परंतु उसे पानी नहीं पिला सकते। उसी तरह से आप लड़कियों को समझा तो सकते हैं, लेकिन उन्हें रोक नहीं सकते।
कारगर है रंग गुलाबी
गुलाबी रंग आंखों को भाता है और 'कलर थैरेपी' में उसका इस्तेमाल त्वचा को सुंदर बनाने और प्रतिरोधक तंत्र को मजबूत करने के लिए किया जाता है। यह व्यक्ति के शरीर और मन पर सकारात्मक प्रभाव डालता है। यह क्रोध को नियंत्रित करता है। गुलाबी रंग व्यक्ति के मन में प्यार, दुलार
सौजन्य से
दैनिक जागरण
भारतीय एकता संगठन

No comments:

Post a Comment